क्या हम दूसरे शाहजहाँ की आशा कर सकते हैं...........

Thursday, August 6, 2009


आप लोगों का तो पता नही पर भइया मुझे तो यही लग रहा है की मैं मुग़ल काल में आ गया हूँ । लखनऊ में जिस स्तर पर निर्माण कार्य चल रहे हैं उससे तो यही लग रहा है । बहिन मायावती जी ने जिस लगन का परिचय दिया है वो काबिले-तारीफ़ है । अरे भाई ! अपने सारे काम-काज छोड़कर जब कोई मुख्यमंत्री इतनी तन्मयता से पार्क और मूर्ति लगवाने पर तुल जाए ( चाहे लोगों को पानी, बिजली, अन्न मिल रहा हो या नहीं ) तो तारीफ़ तो करनी ही होगी ।

अच्छा एक बात और भी है कि इतना सब नाटक होने की बाद भी बहिन जी के कान पर वो तक नहीं रेंग रहा । वैसे इन सब कामों में इतना पैसा खर्च हो रहा है की अगर प्राचीन मिस्र के फ़राओ इसे देख ले तो शर्म से पानी-पानी होकर बह जाएँ और सोचें कि "यार , हम लोगों को थोड़ा और खर्चा करना चाहिए था । " वैसे इस झकड़-पकड़ के बीच बहिन जी ने अपनी एक आलीशान कोठी ( मुख्यमंत्री आवास ) ठोंक दी है । ये इतनी आलीशान है कि पकिस्तान के वजीरे आज़म की भी चीपों चीपों हो जाए और वैसे भी उनको अगर हाफिज़ सईद को पकड़ने- छोड़ने से फुर्सत मिले तब ।

खैर बात का सारांश यह है कि "शायद दूसरे ताजमहल कि आशा करना तो बेमानी होगा पर दूसरे शाहजहाँ की आशा कि जा सकती है .............."

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